Saturday, November 14, 2009

यशपाल


यशपाल हिन्दी के उन प्रमुख कथाकारों में से हैं, जिन्होंने प्रेमचन्द की प्रगतिशील परम्पराओं को आगे बढाते हुये कथा साहित्य को जीवन की कथोर वास्तविकताओं से जोड़ा। अपनी प्रत्येक कहानी में वे किसी न किसी पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर हो रहे शोषण और अत्याचार के विरुद्व वे आवाज उठात हैं।
यशपाल मार्क्सवादी जीवन दर्शन से प्रभावित हैं। साहित्य और राजनीति में एक साथ और समान रूप से सक्रिय हस्तक्षेप करने वाले यशपाल जी का वैयक्तिक जीवन घटनाओं और दुर्घटनाओं का लम्बा और प्रेरक दस्तावेज है।
सन १९०३ में फिरोजपुर छावनी में जन्म लेने वाले यशपाल जी प्रारम्भ से ही पर्याप्त साहसी और निडर थे। आगे चलकर जब ये कालेज जीवन में प्रविष्ट हुये तो देश की राजनीति में इनकी गहरी दिलचस्पी हुई। इस दिलचस्पी ने ही इन्हें विद्रोही बनाया। फलतः ये चन्द्रशेखर आजाद और भगत सिंह के विद्रोही दल से जा मिले।
केवल कहानीकार ही नहीं, एक सफल उपन्यासकार और सधे व्यंग्यकार के रूप में भी यशपाल हिन्दी जगत में विख्यात रहे हैं। इनकी कहानियों की लोकप्रियता का मूलकारण टेकनीक या भाषा न होकर कथा वस्तु है।

यशपाल की रचनायें

कहानी सांग्रह
लैम्प शेड, धर्मयुद्व, ओ भैरवी, उत्तराधिकारी, चित्र का शीर्षक, अभिशप्त, वो दुनिया, ज्ञान दान, पिंजड़े की उड़ान, तर्क का तूफान, फूलों का कुत्ता, भस्मावृत चिंगारी, भूख के तीन दिन।
[यशपाल की सम्पूर्ण कहानियां चार खन्डों में]
उपन्यास
झूठा सच, मेरी तेरी उसकी बात, देशद्रोही, दादा कामरेड,गीता पार्टी कामरेड, मनुष्य के रूप, पक्का कदम, दिव्या, अमिता, बारह घन्टे, जुलैखां, अप्सरा का शाप।
यात्रा विवरण
लोहे की दीवार के दोनो ओर, राहबीती, स्वर्गयोद्यान बिना सांप।
संस्मरण
सिंहावलोकन [चार भागों में]
निबन्ध
रामराज्य की कथा, गांधीवाद की शव परीक्षा, मार्क्सवाद, देखा सोंचा समझा, चक्कर क्लब, बात-बात में बात, न्याय का संघर्ष, जग का मुजरा, [सम्पूर्ण निबन्ध दो खंडो में विभाजित
नाटक
नशे-नशे की बात

1 comment:

सुलभ सतरंगी said...

कथाकार यशपाल जी से आपने अच्छा परिचय कराया.
धन्यवाद आपका!